Posted by: Prem Piyush | January 24, 2007

वो यहीं कहीं है ।


इन अनजान वादियों में,
मैं अदना सा आदमी,
छोटे – छोटे मेरे सपने,
छोटा सा घर मेरा यहाँ,
छोटा सा उपवन मेरा,
छोटी सी तितलियाँ,
मंडराती, छोटे-छोटे फूलों पर ।

कहीं बैठी है, छोटी सी,
प्यारी, साँवले सपनें संजोए,
बुनती रंगीन गलिचे,
उस गाँव के साये में,
गाँव की भाषा में गाती ।
पर ऐसा लगता है,
बगल से गुनगुनाती,
हँसती, बस चली जाती ।

कहती हवाओं से,
पगली, दिशाओं से,
मन्नतें माँगती,
बस दुआ करती,
भुलने के लिए याद करती ।
यहाँ मिलती उसकी,
देह की एक खुशबू,
इन्हीं वादियों में,
पता नहीं, कैसे आती ।

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Responses

  1. hello.
    it really very good poems……
    i also write poems but cnan’t write blog in hindi can u can me for this.
    hemjyotsana.wordpress.com
    Thanks
    and good wishes 4 ur future and life…..

  2. सर जी हिन्दी में ब्लोग लिखना सीख लिया हमने 🙂
    और आज अपनी इस comment को भी ढूँढ लिया ।
    एक साल चार दिन होगये इसे ।
    वैसे thanks sir jee
    सादर
    हेम

  3. Is this really a dream or reality……….

    Beautiful. Full of love and passion.

  4. […] वो यहीं कहीं है । […]


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