Posted by: Prem Piyush | January 4, 2007

कैसे बताऊँ नई खबर ?


राह चलते कोई मिलता,
वो बैचेनी अपनी जताता,
आखिर वो भी पुछ लेता-
बताओ कोई, नई खबर ।

किसी तरह उनको बहलाता,
फिर झुठे-सच्चे बातें बताता ।
बेचारा वह समझ सब जाता
कहाँ से देता, नई खबर ।

एक का पीछा जब छुटता,
दूसरा वहीं पर रुक जाता,
तीसरा फिर दौड़ा आता,
सुनने के लिए, नई खबर ।

कैसे लोगों को मैं समझाता,
समय अपनी गति है चलता ।
परिणाम पहले अगर जान पाता,
तो बन जाती, एक नई खबर ।

आज मेरा मित्र तू जो होता,
मौन मेरा तू फिर समझता ।
बातों में मुझे फिर बहला देता,
जब तक न बनती, नई खबर ।

फिर उनके घर जाकर कहता,
ढ़ेर सारी मिठाई  बँटवाता ।
और गले लगकर उनका मै,
फिर जरूर बताता, नई खबर ।

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