Posted by: Prem Piyush | November 24, 2006

ऐसे हैं कुछ रिश्ते


वो कहते, भुल जाओ सब,
वो कहते, मोड़ दो राहें,
वो कहते, तोड़ दो रिश्ता,
रिश्ते
वो कहते, किस्से हैं सारे ।

जानकर भुल गया सब मैं,
रंगीन दुनिया में खो गया,
हँसता- गाता, आवारा सो गया,
पर वह रात सपनों में आ गया ।

सुबह मोड़ दिया, रास्ता अपना,
अनजानी राहों पर निकल पड़ा,
भुल गया सारे गलियाँ रास्ते ,

वह अनजाने मोड़ पर दिख गया ।

फिर, उसे तोड़ दिया, टुकड़ों में,
फिर, बेजान टुकड़ो को पीस दिया,
देखा, वो धूल बनकर बिखर गया,
मेरी माटी में अमिट बस गया ।

ऐसे हैं कुछ रिश्ते ।

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