Posted by: Prem Piyush | November 22, 2006

अनजानी बातें


काश मैं समझ पाता,
गुलमोहर पर बैठे,
पंछियों की आवाज,
उनके गीत, उनकी वाणी ।

उनके ही तरह मस्त,
काश वैसे ही दौड़ पाता,
पतली सी टहनियों पर
गिलहरियों के साथ ।

काश मैं समझ पाता,The colors
तितलियों की टोली को,
खिले फुलों से उनकी बातें ,
फिर चुपके से रंग चुराना ।

काश मैं समझ पाता,
वे सब अनजानी बातें,
तैर रही थी पुरवैया में,
बस छु कर निकल गयी ।

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Responses

  1. Simple Short an Sweet…Good Work… Keep it up….


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